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Friday, October 23, 2015

आख़िर यह जीवन क्या है ?


बचपन से ले केर अब तक
जो भी हुआ ,
या जो मैंने चुना ।
और चाह कर भी जो मैं कर न सका
वो कहाँ गया ?

वह एक राह
जिस पर चल कर मैं
यहाँ तक पंहुचा ।
और वो  रास्ते जिन पर मैं चल न सका ,
वो कहाँ गये ?

वह विकल्प
जो मैंने चुनें
जिन पर मैं स्थिर रहा ।
और समय की धारा जो बह गयी
वह कहाँ गयी ?

या' यह पल, हाँ यही पल
जो गुज़र रहा है अभी ।
और इसे समेटने की क़ोशिश मे ,
जो शब्द नहीं मिल रहे
वो कहाँ गये ?



2 comments:

Abhishek Pathak said...

जो शब्द नहीं मिल रहे
वो कहाँ गये ?
kya likha hai dost, Brilliant. Super awesome

Two Cup Tea said...

Thanks bhai...